WAAREE ENERGIES को बेचने की लगी होड़ क्या है बड़ा कारण?
WAAREE ENERGIES के शेयर बुधवार को 10% तक गिर गए। यह लिस्टिंग के बाद से एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। इस गिरावट के बाद स्टॉक ने दो दिन की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया है। और अगर वही बात करें गुरुवार की तो यहां पर STOCK में गिरावट ही देखने को मिली|WAAREE ENERGIES Share: वारी एनर्जीज लिमिटेड के शेयर बुधवार को 10% तक गिर गए। यह लिस्टिंग के बाद से एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। इस गिरावट के बाद स्टॉक ने दो दिन की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया है। कंपनी के शेयर आज 2342 रुपये के इंट्रा डे लो पर आ गए थे। इससे पहले इसका पिछला बंद 2425 रुपये था। बता दें कि तीन महीने की शेयरहोल्डिंग लॉक-इन अवधि खुलने के बाद आज स्टॉक फोकस में रहा।
अमेरिका से क्या आई बुरी खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अपने पद को संभालने के साथ ही भारत में सोलर एनर्जी पर काम कर रही कंपनियों के शहरों में बड़ी कमजोरी देखने को मिली सोलर पैनल बनाने वाली भारत की दिग्गज कंपनी प्रीमियम एनर्जी और WAAREE ENERGIES के शहरों में लगातार गिरावट हो रही है डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते यह माना जा रहा है की डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस समझौते से अलग होते ही कच्चे तेल की की खुदाई पर ज्यादा जोर दिया है और उन्होंने कहा है कि अमेरिका में कच्चे तेल की खुदाई बहुत जोरों से होगी और उन्होंने यह भी कहा कि ड्रिल बेबी ड्रिल इसका मतलब है कि हमें और कच्चा तेल जमीन से बहुत आयात में निकलना है मेरी समझौते को अमेरिका ने मानने से मना कर दिया आपको बता दें ऐसा करते ही सोलर एनर्जी की रफ्तार पर ब्रेक लगा है
पेरिस समझौता क्या है?, मैं संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में विश्व नेताओं ने 12 दिसंबर 2015 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की: ऐतिहासिक इसे समझौता कहा जाता है
इस समझौते के अंतर्गत
- वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के लिए वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को पर्याप्त रूप से कम करना तथा इसे पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के प्रयास जारी रखना, यह मानते हुए कि इससे जलवायु परिवर्तन के जोखिम और प्रभाव काफी कम हो जाएंगे
- इस समझौते के उद्देश्य और इसके दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रगति का समय-समय पर आकलन करना
- जलवायु परिवर्तन को कम करने, लचीलेपन को मजबूत करने और जलवायु प्रभावों के अनुकूल होने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विकासशील देशों को वित्तपोषण प्रदान करना।
वहीं दूसरी ओर सोलर एनर्जी और सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनियों को इस समझौते से काफी फायदे मिलते हुए नजर आ रहे थे WAAREE ENERGIES क्योंकि भारत ही नहीं दुनिया में सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग करती है और अमेरिका में भी इसका एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है तो माना यह जा रहा है कि अमेरिका में सोलर पैनल की खपत अगर कम होती है तो इससे सोलर मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनियों को जिसमें कीWAAREE ENERGIESशामिल है बड़ा नुकसान हो सकता
WAAREE ENERGIES एक और मुख्य कारण
आईपीओ की लिस्टिंग के बाद WAAREE ENERGIES के शहरों में लॉकिंग पीरियड का भी खतरा बना हुआ थालॉक-इन अवधि के खुलने के साथ कंपनी के 40 लाख शेयर या बकाया इक्विटी का 1%, व्यापार के लिए इलिजिबल हो गए। बता दें कि शेयरधारक लॉक-इन खोलने का मतलब यह नहीं है कि सभी शेयर खुले बाजार में बेचे जाएंगे। वे बस व्यापार के योग्य बन जाते हैं। 25 अप्रैल, 2025 वारी एनर्जीज के लिए एक और महत्वपूर्ण ट्रेडिंग सेशन होगा क्योंकि इसका छह महीने का शेयरधारक लॉक-इन उस दिन खुलेगा। इसके छह महीने के लॉक-इन के खुलने से 15.3 करोड़ शेयर या कंपनी की बकाया इक्विटी का 53% कारोबार के योग्य हो जाएगा।
WAAREE ENERGIES शानदार हुई थी लिस्टिंग
आपको बता दें कि WAAREE ENERGIES पिछले साल की सफल लिस्टिंग में से एक रही है। हालांकि, स्टॉक लिस्टिंग के बाद उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अब रिकवर मोड में है। वारी एनर्जीज के शेयर बुधवार को 9.1% गिरकर ₹2,428.9 पर कारोबार कर रहे हैं। स्टॉक पहले ही ₹3,743 के अपने पोस्ट-लिस्टिंग शिखर से 35% नीचे आ चुका है।
बता दें कि प्रमुख WAAREE ENERGIES 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में बंपर शुरुआत की थी। वारी एनर्जी के शेयर बीएसई पर 2,550 रुपये पर लिस्ट हुए थे, जो आईपीओ प्राइस 1,503 रुपये के मुकाबले 69.66 प्रतिशत का प्रीमियम पर था। यानी आईपीओ प्राइस से अब भी यह शेयर 57% ऊपर है।

